Writing is an art that comes from within. Enhancing of emotions endured by living beings is done through writings. Situations aren’t just the falling of images on the retinal screen. Feelings are focussed. Mind scans the vision. The brain induces a reaction mechanism whereby it senses the type of feeling imbibed. Finally, the heart interprets it, in a way that soothes our soul or tears us apart.

Writing is a special phenomenon that possesses only a reaction perspective with respect to feelings. The action part could be anything in this world. It could even be the destiny’s conspiracy to heal people through your writings and make you acknowledged for penning down touching words. Letters combine to words that further join together to form sentences that are loud to say and quiet to keep. There is no syntactical expression to pursue writing.

It is done the way your life should be, your way, yours, and only yours. A definite two-liner could be as deep as an infinite paragraph holding soul-awakening thoughts. The cons of writing account to lack of facial reaction. But I feel, words provide that warmth, that realness, which is becoming rarer these days with growing duplicity and toxicity in human nature.

Words do carry feelings, a magical quality of writing, enabling readers to relate to them. That’s why love letters are more romantic than flaunting your partner’s abilities publicly! The universe is vast, not only in its spacial arrangement but also in the uniqueness it has gifted every individual. And so, not everyone is allowed to share the same future. In other words, two individuals can have characteristics and physical similarities.

But not both of them are meant to dream the same bliss. At hard times we do think of giving up our passion, or our words, but trust your stars, the constellations will reflect glow on your personality. Writing isn’t done to overcome depression, instead is an enthralling creation that helps us learn more, confess more, feel the utmost. It’s an optimistic approach to situations that try to put you down. Feel the words. Trust the magic. Life turns shiny there!

முதல் நாள் அன்று:

கடந்த வாழ்க்கையில் கரைந்த முதல் நாள் ஒன்று….

பாதை பார்த்து சென்ற நான் அவன் பாதம் பார்த்து செல்ல தொடங்கினேன்…

அன்றோ நான் கேட்டதெல்லாம் அவன் பேச்சு,சுவாசித்ததெல்லாம் அவன் மூச்சு…

காற்றோடு கரைந்தது நேரம் மட்டுமல்ல நானும் தான்…..

உலகை சுற்றும் தூசியை போல் அவனோடு சுற்றினேன்…

காலையும் ,மாலையும் கரைந்தது….நிலவும் , இரவும் நிறைந்தது.‌…

சற்றேன்று மாறும் வானிலை போல்……

மாறினான் அவன்…

கையில் பூ கொண்டு….

கண்ணில் காதல் கொண்டு…..

நெஞ்சில் என்னைக்கொண்டு…

மண்டியிட்டு பார்த்தான் என்னை…

மயங்கியது பெண்மை மலர்ந்தது காதல்…….

என் 20 ஆண்டு தனிமை 20 நொடிகளில் முடங்கியது…

ஓடத்தில் ஓடும் படகாய் அவனோடு ஓட தொடங்கிய  முதல் நாள் அன்று……..

கைவண்ணம்-சந்தியா

कब खत्म होगा शिकायत का सिलसिला 

कहीं दूर न हो जाए हमसे कोई अपना ।

वक्त की आदत है ना ठहरने की 

बिन माँगे गमों के संयम में डूबोने की।

क्यों छोटे से सफर में है इतने गिले

एक बार खुल कर जीवन तो जी ले।

हर सुख है दामन में फिर भी मन बेचैन है 

उल्लासमय जीवन में भी अश्रुओं से भरे नैन हैं।

कब कुदरत का वो लाजवाब कमाल होगा 

प्रेम के रस में बंधेंगे, एकता का जाल होगा ।

एक बार फिर बांधो भरोसे की कड़ी 

छूट ना जाए उससे पहले जिंदगी की लड़ी ।

                         – वंदना झा 

अजब हे ये दुनिया और उसकी रीत

क्या कब बदल जाये किसीको खबर नहीं

पहले बी पॉजिटिव   कहा जाता था

पॉजिटिव लोगो के साथ रहा जाता था

पर बदल गयी  कोरोना के आने से दुनिया की रीत

अब तो पॉजिटिव कोई बना नहीं चाहता

ना पॉजिटिव के साथ रहना नहीं चाहता

नेगटिव अच्छे  सेफ और सुरक्षित लगने लगे

जिस माँ ने नौ महीने पेट में रखकर प्यार दिया , दुलार दिया , “तुम भूल गए”,

जिस पिता ने हाथ थाम कर खुद गिर कर तुमको चलना सिखाया ” तुम भूल गए “,

दो – चार दिन के प्यार के लिए तुमने अपने माँ – बाप को छोड़ दिया जिसने तुम्हारी खुशी के लिए अपनी खुशी नहीं देखी “तुम भूल गए”,

जिस माँ – बाप ने खुद भूखे रहकर तुम्हारा पेट भरा तुम उन्हें बेसहारा छोड़कर चले गए “तुम भूल गए”,

अपनी खुशी के लिए तुम ने उन्हें अकेला छोड़ दिए “तुम सब भूल गए”।

गांव के बाहर एक साधु रहते थे। अचानक एक दिन एक काली छाया को गांव में जाते देख कर बोले तू कोन वो

बोली मैं मौत हूं अभी जल्दी से कुछ लोगों को मारना है जरा महामारी फैला कर, साधु बोले कितने मरेंगे उसने

कहा हजार एक बस—– कुछ दिन में पता चला करीब बीस तीस हजार मर गए। जैसे ही मौत गांव से बहार जाने

लगी साधु बोले धोखेबाज एक हजार की जगह कितने हज़ार गये। वो बोली मैंने सिर्फ हजार ही मारें है बाकी सब

तो भय से मरे हैं।यही शाश्वत सत्य है। हमें किसी भी मुसीबत से डरना नहीं बल्कि हिम्मत से काम लेना होगा यही

सच्चा संदेश है

चौदा साल पहले हो गयी कलम से दोस्ती । …….

टूटी फूटी अक्षरों से पक्तियाँ जुड़ गयी। …….

धीरे धीरे सुर मिल गए उन पक्तियोंको । …….

और एक सुन्दर कविता बन गयी । …….

फिर उन टूटी फूटी अक्षरों को सुधार मिल गयी । …….

और लिखते लिखते एक कहानी बन गयी । …….

अब तो कितनी कहानी कितनी कविता । …….

मेरे हाथो से लिख गयी । …….

अब तो ना ठहरेंगे हाथ लिखने के लिये । …….

जो कलम में ने उठा लियी । …….

बाप्पा आज आ गए। ….

विराजमान हो गए। …..

लाये वो खुशियाँ ढेर सारी। …..

ख़त्म करे विघ्नो की कटोरी। ..

मोदक लड्डू अनेक भोग बनेगे। …

सोशल डिस्टन्सिंग और सारे नियमो का पालन कर के हम ये उत्सव मनायेगे। …

पर अफ़सोस होगा। …

नहीं मना पायेगे पहली की तरह  उसी जोश से। ….

पर करेंगे विनती हम बाप्पा से। ….

बदल दे ना ये दिन पहले जैसे। …

तो धूम धाम से होगा तेरा आगमन। …

अगले बरसे। …

फिर गूंजे का आवाज ढोल नगारोंसे। ….

पूरा समां घूमे का तेरे जयजयकार से। …

“I’ve reached the station, Mumma. See you in half an hour” I said walking towards the bus station. I kept checking the time. It was 12:03 am. Nothing except the station lights looked bright that night. After waiting for 10 minutes, the bus to Andheri arrived. Seeing the bus, I smirked, as the bus was completely deserted.

I quickly selected the window seat and took the boarding ticket from the conductor. The roads were utterly calm and the streets which were always dimly lit were completely dark. The bus halted suddenly and a middle-aged lady boarded the bus. Although the bus was completely empty, she chose to sit beside me.

I broadly smiled and adjusted myself more towards the window to make space for the lady. The conductor who was sitting in the adjacent gents row stared at me suspiciously. I wondered whether he’s drunk on duty? The lady softly said,  “Doesn’t the conductor seems a bit odd ?”  “Yes,” I said in confirmation. A few moments later the bus arrived at my stop.

I walked to the door to alight from the bus when the conductor quickly paced towards me and whispered in my ears from behind “Who were you talking to? There wasn’t anyone beside you”.                                      – Shraddha 

किसी की मदद करना, अच्छा कार्य कहलाता है।

ऐसा करना आपके जीवन को सफल बनाता है।

किसी की मदद करने से उसका जीवन तो बदलता ही है, और स्वयं को भी खुशी प्राप्त होती है।

ऐसे अनेकों उदाहरण है, जिन्होंने अपना जीवन दूसरों की सेवा में लगा दिया और

वे आज मरकर भी अमर बन गए। लेकिन एक अच्छा व्यक्तित्व इस वाक्य को हमेशा याद रखता है –

” नेकी कर दरिया में डाल”।

Think of the thankless morning,

The gifts of noon unused,

Think of the eye of scorning,

The night of refused prayers.

Oh world!! I can’t hold the close enough,

The winds,the wide grey skies!

The mists,that roll & rise!

I stand amid the roar,

Of a surf-tormented shore,

And I hold within my hands,

Grains of golden sand!!!

Once I dipt into the future far,

As human eye could see!

And I saw the chief forecaster,

Dead as any one can be!!

People burns the earth,

But sun never do it!!

From the lightning in the sky,

From the thunder &strom,

And the cloud that took the form!!!!!

नर नारी पर लोग सवाल है उठाते

इनके भेद भाव को हटाने के लिए

जान लेने व देन पर भी उतर जाते

आज की जनता इन पर बहुत गर्व है करती

दूसरी तरफ हमें यू देखकर हंसती

मनोरंजन का हमे यू पात्र बनाया

कई लोगो को यह बात समझ भी आया

नाच , गाना , दुआ करना

सायद यही है बस काम हमारा

ऐसा मै नहीं दुनिया के लोग है कहते

किन्नर , हिंजरा , ट्रांसजेंडर नाम से कहते

पैदा होते ही घर से निकाल दिए जाते

आए तो हमभी नर नारी से ही है

पर इन्हें सम्मान देते  वक्त लोग हमें क्यों भुल जाते?

अलग सी होती बस्ती हमारी

जिसमे हमारे जैसे लोग ही रहते

हम्भी अपने सपनों को नाम देना चाहते

पढ़ लिखकर नर नारी के तरह सम्मान पाना चाहते!

पर यह सब भी रात के सपने जैसा लगता

जो बंद आखो से एक उम्मीद जगाता

आंख खोलते ही गायब सा हो जाता

हमें भी क्या कभी बराबरी मिलेगी

नर नारी के तरह वह हर सम्मान मिलेगी

क्या तर्क से फर्क आ पायेगा?