व्यक्ति की सोच ही उसे बनाती है।
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व्यक्ति की सोच ही उसे बनाती है।

एक महान सोच रखिए

श्रेष्ठता जन्म से नहीं मिलती यह व्यक्ति की सोच और कर्मों का प्रतिफल है। आप ही अपनी सोच से खुद को बनाते हैं।

सफलता की नींव है, आपका अपने जीवन के प्रति दृष्टिकोण, आपकी महान सोच। उदाहरण अगर आपने यह आर्टिकल पढ़ना चाहा तो ही आप पढ़ेगे, आप न चाहें तो नहीं।

आप अपनी सोच के जिम्मेदार स्वयं ही है। मतलब दोस्तों, जो कुछ भी आपके साथ होता है, वो आपके ही सोच और प्रतिक्रिया का परिणाम हैं।

हमेशा याद रखे एक महान सोच असंभव कार्य को भी संभव बना देती है। हमारे समाज में ऐसे बहुत सारे सफल व्यक्तियों के उदाहरण है जिन्होंने अपने महान सोच के दम पर इस दुनिया को हिलाकर रख दिया।

ये थॉमस ऑलवा एडीसन की सोच का ही तो परिणाम है, जिसने उन्हे समाज के लिए कुछ बड़ा करने के लिए प्रेरित किया और इस पृथ्वी को दुसरा ‘सूरज’ मिला। उनका अपने कर्म के प्रति, अपने लक्ष्य के प्रति महान सोच ही थी जिसने उन्हे हार न मानने की शिक्षा दी। तभी तो इतनी सारी असफलता के बावजूद वे सफल हुए और समय के अंत तक वे अमर रहेंगे।

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की शक्तिशाली सोच ने ही उन्हे देश के लिए कुछ बड़ा करने के लिए प्रेरित किया। उन्होने अपने विचारों की शक्ति से दुश्मनों के दाँत खट्टे किए और अंत मे अंग्रेज़ों को उनके सामने झुकना ही पड़ा और हमें आज़ादी मिली। उनका अपनी महान सोच और विचारधारा पर अडीग विश्वास ही उन्हे प्रेरणा देता था।

माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की महान सोच ने हम सबको यह बताया है कि आपने कहाँ जन्म लिया इससे अधिक महत्वपूर्ण है, आपका अपने जीवन के प्रति ‘दृष्टिकोण’ और इसी विचानधारा के दम पे, वे आज भारत का परचंम सारी दुनिया में फैला रहे है। वे न केवल देश मे बल्कि विदेशों मे भी अपनी नेतृत्व का डंका बजा रहे हैं।

ऐसे अनेकों उदाहरण और भी हैं।

“यह संभव है” आप कहेंगे कि यदि सोचने से ही हम महान, धन-वान, सफल बन जाते तो हमें कुछ करने की जरूरत ही नहीं, हम मात्र सोचते रहें और एक दिन खुद बन जाएगें, तो मेरे प्रिय मित्रों वो दिन कभी नहीं आएगा। क्योंकि केवल सोचने से ही आप सफल हो जाओगे, ये सत्य तो है, मगर पूर्ण-सत्य नहीं। लेकिन फिर भी हमारे उपलब्धियों का मूल कारण हमारी ‘सोच’ ही तो हैं। हमारा भविष्य, हमारी सफलता उन सोच विचारों की देन है, जो हमारे मन मे आई।

अर्थात, क्या आपकी महान सोच ही आपके सफल जीवन की ओर पहला कदम नहीं ?

स्वयं विचार कीजिए।

महान दृष्टिकोण की शक्ति

सकारात्मक सोच, समस्याओं से न डरना, अपना कर्म करते रहना तथा अपने कर्म के प्रति हठ स्वभाव और समाज तथा देश के लिए कुछ करने की इच्छा ही एक ‘महान सोच’ कहलाती हैं।

आपने ‘जितेन्द्र अधिया’ की प्रसिद्ध किताब ‘स्प्रिंग ऑफ इंस्पिरेशन’ का मोटिवेशनल quote तो पढ़ा ही होगा।

“चीज़ें सबसे पहले मनुष्य के दिमाग में होती हैं,

इससे पहले की वो इस दुनिया मे हो”।

मतलब हर बड़े काम की शुरुआत एक महान सोच से ही होती है। इसलिए ‘सकारात्मक सोच” पर बल दिया जाता हैं। क्योंकि ये हमारे मन में सकारात्मक उर्जा को जन्म देती है। हम अच्छा सोचते है, और अच्छा ही करते है। अपने लिए भी और देश के लिए भी।

प्रसिद्ध मोटिवेशनल स्पीकर ‘शिव खेड़ा’ ने अपनी किताब ‘जीत आपकी है’ मे दृष्टिकोण को सबसे महत्वपूर्ण बताया है। वे बताते है कि,

योग्यता हमें सिखाती है कि हम कैसे करते हैं,

प्रेरणा निर्धारित करती है कि हम क्यों करते हैं,

और ‘मनोवृत्ति’ यह तय करती है कि हम कितना अच्छा करते हैं।

मतलब किसी काम को कितना अच्छा करना है, ये हमारी सोच पर निर्भर करता है।

क्या ऐसा नहीं होता ? स्वयं विचार कीजिए।

प्रसिद्ध लेखक ‘नेपोलियन हिल’ ने अपनी किताब ‘सोचिए और अमीर बनिए’ मे मनुष्य की सोच पर विशेष बल दिया हैं। वो लिखते हैं कि आपका Attitude, आपको अमीर बना सकता हैं। आप कितने अमीर बन सकते है, ये इस बात पर निर्भर करता है कि आपने अपने दिमाग मे कितना अधिक धन राशि कमाने की सोच बना रखीं हैं।

अब यहाँ से आपको ये ध्यान रखना होगा कि आप अपने सोच की शक्ति को बढ़ाइए। अपने विचारों को बड़ा और स्पष्ट कीजिए, सीमित मत रखीए। पर हम में से अधिकतर लोग, जीवन के इस सत्य को कभी समझ ही नहीं पाते।मुझे हैरानी होती है, ऐसे लोगों से मिलकर।  वे कभी अपने जीवन में कुछ बड़ा करने की सोचते ही नहीं है।

भारत के पूर्व राष्ट्रपति और ‘मिसाइल मैन’ डा. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जी कहते थे कि, ‘यदि आप बड़े सपने नहीं देखते, तो आप बहुत बड़ा गुनाह कर रहे हैं’। हर पल कुछ नया करने की इच्छा रखिए। इस देश और समाज के लिए कुछ बड़ा करने की सोच रखिए। क्योंकि ‘अगर आप सोच सकते है तो, आप कर भी सकते हैं’।

अर्थात, क्या आपकी महान सोच ही आपका और आपके समाज का विकास नहीं करती ? स्वयं विचार कीजिए।

आप ‘जैसा सोचोगे वैसा ही बनोगे’ ये तभी संभव होगा, जब आप अपनी सोच को महान बनाओगे

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