Poem

बाप्पा

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बाप्पा आज आ गए। ….

विराजमान हो गए। …..

लाये वो खुशियाँ ढेर सारी। …..

ख़त्म करे विघ्नो की कटोरी। ..

मोदक लड्डू अनेक भोग बनेगे। …

सोशल डिस्टन्सिंग और सारे नियमो का पालन कर के हम ये उत्सव मनायेगे। …

पर अफ़सोस होगा। …

नहीं मना पायेगे पहली की तरह  उसी जोश से। ….

पर करेंगे विनती हम बाप्पा से। ….

बदल दे ना ये दिन पहले जैसे। …

तो धूम धाम से होगा तेरा आगमन। …

अगले बरसे। …

फिर गूंजे का आवाज ढोल नगारोंसे। ….

पूरा समां घूमे का तेरे जयजयकार से। …

कलम
The bus

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