माँ मेरी दुनिया
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माँ मेरी दुनिया

ये शब्द जितना छोटा है ।

अर्थ उतना हि जेहेरा ।।

प्यार मोहोबत जिसमे सब समाया है ।

जिसने इस जाहन को बनाया है ।।

रब भी उसकी आचल के दीवाने है ।

वो भी माँ के आगे हारे है ।।

इस मतलबी दुनिया मे कोन काहा किसी का सोचता है ।

एक माँ के आगे सब फ़िका है ।।

हर बार मुझे सही राह दिखाती है ।

हिम्मत के साथ साथ अच्छा इंसान बन ना सिखाती है ।।

वो माँ हि होती है जो बच्चों कि खुशी के लिए सब कुछ कर जाती है ।

इस दुनिया से भी लड जाती है ।।

कभी कभी उनकी डाट मे प्यार छुपा नज़र नही आता ।

पर जब भी अन्धेरा हो माँ लफ़्ज़ हि आता ।।

माँ क्या होती है ये

शब्दों मे बता नहि सकते ।

उनका प्यार इस दुनिया के प्यार से मिला नहीं सकते ।।

वो हर बात सेह जाती है ।

हर गाव पे मुश्कान लगा जाती है ।।

खुद जमीन पे सो कर ।

बच्चों को बिश्तर पर सुलाती है ।।

जितनी फ़िक्र मेरी माँ ने कि सयद हि कोई करेगा ।

जरा सी डेरी हो जाए ओर दिखाई ना दु तो ।

यु बात बात पे चिनता कोन करेगा ।।

हर पल रहना मेरे साथ माँ ।

तेरे बिना मेरा कोई नहीं याहा ।।

बिन माँगे रब ने खुद से मिलाया है ।

तुझसे मिला कर सब कुछ भुलाया है ।।

ये शब्द जितना छोटा है ।

उतनी हि बडी है माँ ।।

जिसको लफ़्ज़ मे बयान नहीं किया जा सकता

वो है माँ ।।

जिसकी दुआ कभी खली नहीं जाती ।

अपने बच्चों के लिए सब कुछ कर जाती ।।

उसके बारे में जितना कहो उतना कम ।

माँ कि ममता उसके सिवा दुनिया कि सभी चीज है कम ।।

घर की रोशनी सबको सम्भाल ने वाली ।

मेरी माँ है मेरी रक्षा करने वाली ।।

जब उसकी दुआ मेरे साथ होती ।

तो हर काम थिक हो जाता ।।

वो है हि इतनी प्यारी के ।

उसकी जगह कोई ओर नहीं ले पाता ।।

भगवान हर पल साथ नहीं रह सकता ।

इसलिए उसने माँ बनाई ।।

अपने जरीये हमे इस दुनिया से मिलाई ।।

बिन बोले बात समझ जाती है वो ।

इस दुनिया मे वो हि है जो बिन मांगे खुशीया दे जाती है वो ।।

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