इस महामारी ने वैश्वीकरण को मजबूत किया है या कमजोर
Share on facebook
Share on twitter
Share on linkedin
Share on whatsapp
Share on telegram
Share on skype

इस महामारी ने वैश्वीकरण को मजबूत किया है या कमजोर

विषय थोड़ा सा कठिन भी है, थोड़ा गहन भी है। थोड़ा सा अध्ययन करने लायक भी है। उपरोक्त प्रश्न आपको विचार करने पर प्रवृत्त करता है। आजकल हमारी धरती कोरोना के महामारी से प्रभावित हो गयी है। इसी महामारी से झुँजते हुये लोग के हाल बहुत ही खराब हो गये है। बहुत सारे लोगों ने अपने परिवार को खोया है। बहुत सारे देशों की अर्थव्यवस्था ठप्प होने के कगार पर है। इसी कारणवश आम जनता के सामने यह सवाल उत्पन्न होता है कि इस महामारी ने वैश्वीकरण को मजबूत किया है या कमजोर किया है? इसी प्रश्न का जवाब हा भी है तथा ना भी है। तो आये जानते हैं कि इस सवाल का जवाब।

प्रगति और आधुनिकरण के नाम पर पूँजीपति अपने स्वार्थ की पूर्ति कर रहे थे। प्रकृति एवं धरती की दुर्दशा करके उसके अन्य संतानों की नृशंसता से संहार किया जाता था। निजी स्वार्थ एवं उज्वल भविष्य की कामना करते-करते निष्पाप वृक्ष और पशुओं को मौत के घाट चढ़ाया जाता हैं था। अपने अहं भाव को सिद्धहस्त करने के लिए, प्रतिशोध लेने के लिए तथा शक्ति प्रदर्शन के लिए परमाणु बम तथा प्रक्षेपास्त्र की निर्मिती कर रहे थे।प्रतिस्पर्धा की इस दुनिया में मानव ने मानवता, कारुण्य, ममता नामक भावनाओं की बलि चढ़ा दी थी। पैसों की लालसा में मनुष्य एक- दूसरे का प्यासा बन गया है। राजनीतिक प्रशासनें अपने निजी स्वार्थ तथा अहं के चलते षडयंत्र बनाकर लोगों में जाती, धर्म, भाषा आदी विषयों पर दंगे निर्माण कर रहे थे। आपसी संघर्ष तथा भौगोलिक विस्तार करने के हेतु से अनेक राष्ट्र युद्धसामुग्री के साथ ही विज्ञान की सहायता से जैविक हथियार बना रहे थे। तथा उसी का उदाहरण है कोविड-19 की बिमारी।

अगर इस महामारी का जवाब है तो थोड़ा सा इस महामारी के बारे में जान लेते है। कोविड-19 या फिर ‘नोवेल कोरोना’ के नाम से पहचानी जानेवाली इस बीमारी का जन्म चीन के वुहान शहर की प्रयोगशाला में,2019 साल के दिसंबर के 10 को  हुआ था, जब उसका पहला मामला मिला था। हालाँकि इस बीमारी के बारे में बहुत सारे अफवाहें तथा सिध्दांतों को पैदा किया है।अगर हम बात करें अफवाहों की तो मुख्यतः यह कहा जाता है कि यह रोग वैज्ञानिकों द्वारा पैदा किया है; परंतु सिद्धांत यह है कि यह चमगादड़ो से उत्पन्न हुआ है तथा उनका माँस सेवन करने के वजह से यह इंसानों में पाया गया है।

खोजकर्ताओं की मानें तो यह भी सामने आया है कि इस बीमारी के गुणधर्म ‘सार्स’(SARS) तथा ‘मिअर्स’( MERS) रोगों के गुणधर्म से मेल खाते हैं, जिसके वजह से कोविड को ‘सार्स-कोविड़’ भी कहा जाता है। कोरोना के बदलते स्वरूप के कारण उसे ‘नोवेल कोरोना’ भी कहा जाता है। अभी जो कोरोना के विषाणु पाये गये हैं वह कोरोना विषाणु जाति की सातवीं पीढ़ी है। उससे पहले जो छह पीढ़ी मिली वह सिर्फ जानवरों में पायी जाती थी। कोरोना के दोन प्रकार हैं। पहला ‘एल’ प्रकार और दूसरा ‘एस्’। दोनों ही बहुत खतरनाक ।

अगर इसके लक्षणों की बात करें तो कोरोना का संक्रमण हो जाने पर वह एक साधारण फ्लू की भाँति अपना असर छोड़ता हैं ।खाँसना, छींकना कंपन के साथ बुखार, साँस लेने में तकलीफ़, आदि लक्षणों के साथ ही डायरिया, न्यूमोनिया, लगातार नाक बहना,आदि लक्षण भी दिखाई देते हैं। इससे अपना बचाव करने के लिए कुछ नियमों का पालन करना आवश्यक हैं जैसे की सोशल डिस्टन्सींग का खयाल रखना, मुँह पर मास्क बाँधना, साबुन तथा हँडवॉश का इस्तेमाल करके 20 सेंकद तक हाथ धोना, आदि । अगर हम इन बातों का खयाल रखें तो हम कोरोना होने से बच सकते है।यह सब हो गया कोरोना विषाणु के बारे में, परंतु इसी कोरोना विषाणु ने तहलका मचा दिया है। लोगों की आर्थिक स्थिति पर असर कर रहा है। लॉकडाऊन के वजह से बहुत सारे लोगों ने अपनी नौकरी गवाँ है। मजदूर तथा श्रमिक लोगों की हालत तो बद से बदतर हो गयी है। परंतु इसका लाभ भी लोगों को बहुत हुआ है। इसलिए सवाल का जवाब हा भी है तथा ना भी है।

एक समय ऐसा था कि जहाँ अपराधों की सूची ने इंसानियत को झकझोर करके रखा था। बलात्कार, लूटमार, खून, चोरी आदि की संख्या आसमान को छू रही थी; परंतु लॉकडाऊन के वजह से उसमें काफी हद तक घट हुआ है;  परंतु लॉकडाऊन के वजह से भी घरेलू हिंसा का में बढ़ती जा रही है। कोरोना के वजह से बहुत से सारे देशों के अर्थव्यवस्था ठप्प होने के कगार पर है। अमेरिका जैसे देशों को भी थोड़ी बहुत हानी का सामना करना पड़ा। प्रगत देशों ने  अपने देशों में बडी-बडी कब्र खोदकर उसमें कोरोना से पीड़ित मृतकों के शरीर को इन कब्र में दफनाया है। उसके विरुद्ध भारत जैसे प्रगतिशील देशों में, बहुत सारे मजदूरों ने तथा श्रमिक लोगों ने अपनी नौकरी गवाँ दी है। मध्यम वर्ग के लोगों ने भी अपने काम से हाथ धो दिये हैं। घर में रहने के कारण पुरुष लोग अपना गुस्सा घर की महिलाओं में निकालते है जिसके वजह से घरेलू हिंसा में बढ़ती हो गयी।

जहाँ सत्तारूढ़ दल और विपक्षी दल एक-दूसरें के खिलाफ षडयंत्रो की बौछार करते थे आज वे दोनों इकट्ठे होकर कोरोना का सामना कर रहे हैं। कोरोना पर रोक डालने के लिए एकसाथ मिलकर रात-दिन जुट गए हैं। जहाँ पर साफ करनेवाले कर्मचारी लोगों को दुय्यम स्थान दिया जाता था , आज उन्हें भगवान का दर्जा दिया जाता है। यह  एकमात्र ऐसा रोग है जिसमें पुलिस अधिकारीयों का भी योगदान है। इस पर रोक लगाने के लिए पुलिस अपना सहयोग दें रहे हैं। भगवान ने तो अपने दरवाजे बंद कर दिये हैं परंतु डॉक्टर लोगों ने भगवान का दर्जा प्राप्त किया है।उन्होंने अपने घर- दार को त्यागकर जनता के लिए अपना जीवन दाँव पर लगाया है। लोगों को बचाते-बचाते कई डॉक्टरों ने अपनी जान गँवायी है।

कई देश एक-दूसरें का खून पीने के लिए तैयार है। ताकतवर देश अपनी फौजी ताकद तथा विज्ञान के साथ एक-दूसरें पर हल्ला कर के लिए सज्ज है। जल, थल तथा वायु सेना को  उन्होंने सुसज्जित करके रखा है। वे तो सिर्फ सही समय का इंतजार कर रहे है। हाँली में यह भी सुनने को आया है कि बहुत से देश अंतरिक्ष में युद्ध की रणनीति बनाकर उसे अंमल कर रहे हैं। विश्व में बढ़ते ऐसी रणनीतियों के वजह से राजनीतिक संबंध बिघडते जा रहे है। इस महामारी के कारण नी प्रणाली पैदा होती जा रही है और उसी में से एक है घर पर रहकर काम करना। कार्यस्थलों पर जाकर काम करने वाले लोगों को घर में बैठकर काम करने की आजादी मिल गयी। काम के भागदौड़ से थोड़ी राहत मिल गयी।

इस महामारी के पीछे चीन को दोषी करार दिया जाता है। इसलिए बहुत सारे देश, खास तौर से अमेरिका, रूस, भारत ने चीन पर बहिष्कार डाल दिया है। चीन के बहुत सारे सामग्री पर बंदी डाल दिया है। व्हिडीओ गेम पर भी बंदी डाल दिया है। इसी बुरी हालत में व्यापारी वर्ग फ़ायदा उठाते हैं। रोजमर्रा की चीजों को दुगनी दामों में बेच कर लोगों से अतिरिक्त पैसा हैट ले रहे हैं। जिसके कारण आम आदमी को खाने के लाले पड रहे है। बहुत सारे लोगों ने लॉकडाऊन का मार्ग अपनाकर अपने आपको सुरक्षित रखने का प्रयास कर रहे हैं। लॉकडाऊन के वजह से लोगों को नयी कला सीखने का मौका मिल गया है। कईयों ने तो अपनी कला विकसित की है।

अंत में यही कहना चाहती हूँ कि इस महामारीने विश्व को आर्थिक,  सामाजिक , राजनीतिक क्षेत्रों में कमजोर किया है; परंतु इसके विरुद्ध तकनीकी क्षेत्र में और भी प्रगत बनाया है। कोरोना पर संशोधन करने के साथ ही विज्ञान क्षेत्र और भी बेहतर बनता जा रहा है। लेकिन कोरोना के वजह से पृथ्वी को तथा पशुओं को राहत मिल गयी है।

अतः हमारा यह कर्तव्य है कि हम एक साथ जुट कर कोरोना से लड़े तथा विश्व को कोरोना मुक्त करें।

Share on facebook
Share on twitter
Share on linkedin
Share on whatsapp
Share on telegram
Share on skype

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent Vichars

Related Vichars