Poem

THE BLONDE ON THE SILL

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आज भी रातों में उसे नींद नहीं आती 

आज भी रातों में उसे नींद नहीं आती 

वोह छुपते हुए चांद को मेहसूस करती हैं 

और बाते उगते हुए सूरज की करती है।

उसे आज भी रातों में नींद नहीं आती।

 Brushing away the bruises of the cold sill,

The blonde tranquilises the night with those blue eyes.

She wore, nothing but the silver moonlight,

For her scars were here crest and the pain, her ensign.

As and when the blue of her eyes slowly fades to red,

And memories of past flood her head,

The blonde lets out a peaceful sigh..

Not letting the dreams die,

She lets her heavens cry..

वो गुमसुम इस मेहफ़िल की रवाईष करती है

और बस यूहीं कहीं सिमटकर रेह जाती है 

वोह छुपते हुए चांद को मेहसूस करती हैं 

और बाते उगते हुए सूरज की करती है।

उसे आज भी रातों में नींद नहीं आती,

उसे आज भी,

रातों में नींद नहीं आती।

Overthinking and Anxiety
हाँ माँ, मैं घर हूँ, सुरक्षित हूँ

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