Poem

Meri Vani

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शब्द नहीं निशब्द हूँ मैं , शब्दों का खाली  कोष हूँ मैं  ,
चलते – चलते थम गई मैं , भीड़ का खाली शोर हूँ  मैं,
रक्त हूँ  चरित्र हूँ ,  लहरों का खाली शोर हूँ  मैं,
आँधी थी मैं,  धूल हो गई , हर दिल मैं अब अक्रोश हूँ मैं ,
दुनिया के इस रंगमंच मैं खाली एक डोर हूँ मैं  ,
पर अब जो भी हो एक जोश हूँ मैं  , नई आगाज़ का रोष हूँ मैं ,
निर्मल हूँ , शक्ति हूँ , अनमोल हूँ मैं  , पहचाने गी अब दुनिया
मुझे , जोश हूँ , ज़नून हूँ मैं , ज्वार भाट सी फूट रही आग्नि से
सराबोर हूँ मैं  , रचना हूँ , संरचना हूँ  , ख़ुद की ही  खोज हूँ मैं
नारी हूँ  ,  शक्ति हूँ   , हर जननी का शब्द घोष हूँ मैं |

Migration of labours
Metaphor

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