COVID19: HOW INDIAN CULTURE WILL SAVE US?
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COVID19: HOW INDIAN CULTURE WILL SAVE US?

It is rightly said, “History repeats itself”. एक समय था, जब हम सभी भारतीय अपने संस्कारों पर गर्व करते थे। The reason was that each and every culture that we follow has a scientific and logical learning behind it. And no one was there to contradict the same.

But with the passage of time, development in the field of science and attraction towards other cultures के मायाजाल मे हमारें संस्कार कही खो गए। और देखते ही देखते मनुष्य स्वार्थी, लोभी तथा अहंकारी बन गया। इसका अंजाम उसके साथ- साथ पूरी धरती ने भोगा और आज भी भोग रहें हैं।

लेकिन समय का चक्र देखिए, जो ऐसा घूमा कि आज वही संस्कार इस पूरे धरती के प्रत्येक मनुष्य के जीवन की रक्षा कर रहे है। I know all of you are confused ? Come let’s know.

आज पूरी धरती कोरोना नामक वायरस का शिकार बन चुकी है। शायद ही कोई ऐसा देश हो, जो इससे अछूता हो। और समस्या तो तब हुई, जब ये पता चला कि इसका तो कोई इलाज सम्भव ही नहीं हैं। It’s Impossible. But as you know the word ‘Impossible’ itself spells I’m possible.

फिर ये पता चला की अब भारतीय संस्कार ही इस खतरनाक जानलेवा वायरस के खिलाफ संजीवनी बूटी का काम करेंगें।

Firstly, let’s talk about Social Distancing. The best aid against this virus is to keep distance from others, in order to break the chain of this disease. लेकिन क्या आपने कभी सोचा की इस संस्कार को हम सदियों से अपनाते  आ रहे है। एक निश्चित दूरी मे रहकर एक दूसरे से बातें करना, हाथ जोड़कर अभिवादन करना etc. और विचित्रता देखिए, कभी इसी संस्कार को छुआछुत का नाम देने वाले लोग आज इसी संस्कार को अपनाकर अपने जीवन की रक्षा कर रहे हैं। आज हर जगह इसी संस्कार का पालन किया जा रहा है।

It is rightly said, “Cleanliness is next to godliness”. स्वयं तथा समाज  को साफ – सुथरा रखकर ही इस बीमारी से बचा जा सकता है। हर मनुष्य को यह ज्ञान बचपन में ही दे दिया जाता है, और आज देखिए इसी ज्ञान को जन-जन तक पहुंचाने के लिए government are forced to invest large amount of money. बार-बार हाथ धोना, प्रतिदिन स्नान करना, आस-पास सफाई रखना, शांत स्वभाव रखना etc. क्या ये हमारे संस्कार नहीं थे। Do think it Yourself ! अधिकतर भारतीय घरों में जूते-चप्पलों को रखने के लिए बाहर स्थान बनाए जाते हैं। और बाहर से आने पर सर्वप्रथम हाथ पैर धोने का भी विधान है, यही तो इस बीमारी से बचने का अचूक फॉर्मूला है।

I hope you all must have performed the assignments as told by our Hon’ble Prime Minister Narendra Modiji. Have you ever thought the learning behind those assignments ? 

यह भी भारतीय संस्कारों का ही परिणाम है। शंखनाद, घंटी बजाना, ताली बजाना, बर्तन बजाना तथा दीप जलाना etc. The sound and light energy coming out from these instruments proofs boon to us.These energies kills bacteria and viruses presents in the atmosphere.

हम तो हमेशा से ही भोजन खाने से पहले तथा बाद में हाथ धोते ही है क्योंकि हमारे संस्कार, हमें भोजन करने के लिए अपने हाथों का इस्तेमाल करने की शिक्षा देते है, छुरी और कांटे की नहीं।

प्राचीन काल में मंत्र उच्चारण तथा हवन पूजन कोई अपने स्वार्थ के लिए नहीं करता था, but it is done because it also kills bacteria present in our atmosphere. As we all know “fire purifies our Soul”.

कभी इसी संस्कारों का मज़ाक भी बनाया गया था। आजकल हर छोटी सी छोटी वस्तुओं की सफ़ाई पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, क्योंकि कोरोना इनसे भी फैलता है। इसका अर्थ है की हमें अपने घरों तथा जिस भी वस्तुओं का उपयोग हम करते हैं, उसका साफ होना अनिवार्य है।

 Health is Wealth को सब समझते हैं, लेकिन कुछ ही लोग हैं, जो वास्तव मे health को wealth मानते हैं। हमारे संस्कारों में स्वास्थय को सर्वोपरि माना गया है। लेकिन आजकल सभी को देर से सोना तथा जागना, taking oily and junk food, drinking and smoking, away from physical activities etc. ने अधिक प्रभावित किया है। And as a result there immunity system becomes very weak. और विचित्रता देखिए, आज इस वायरस से बचने के लिए अपने immune system को strong करना अनिवार्य हो गया है। और यह तभी सम्भव हो पाया जब लोगों ने योग तथा व्यायाम जैसे संस्कारों को अपने जीवन शैली में उतारा। योग ने तो भारत का परचम सारी दुनिया में फैलाया है। योग से मनुष्य अपने शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा सकते है।

जो लोग इस बीमारी से पीड़ित हैं या फिर ठीक हो गए हैं, उनको Home quarantine में 14 दिनों के लिए रखा जा रहा है, तथा पूरे देश में सम्पूर्ण lockdown भी है। यह भी इस वायरस से बचने का सरल उपाय है।

लेकिन ये बात जानकर आपको हैरानी होगी कि हमारे संस्कारों में भी home quarantine का उल्लेख       मिलता है। 

During the birth of child, both the mother and the child are kept for 12 days home quarantine, to fight against the bacteria and viruses present in the atmosphere.

And after the death of the person, the identity performing all the last rituals of the latter is also kept for 13 days home quarantine.

Helping others is a good deed.

इस मुश्किल समय में जिस प्रकार सारे देश एक साथ होकर इस बीमारी के खिलाफ लड़ रहा है तथा एक दूसरे की मदद कर रहा है ये सब अच्छे संस्कार के ही चिन्ह है। जरूरतमंदों को जरूरत की चीजें मुहैया करवाना या फिर कोरोना warriors का सम्मान करना, यह सभी कर्म राष्ट्र को ताकत प्रदान करते हैं।

आज लगभग हर देश भारतीय सनातन धर्म जीवन शैली को अपना रहे हैं। जो कभी अपने आप को super power और भारत को कमज़ोर समझते थे, आज वही देश भारत से मदद मांग रहे हैं। जिन्होंने कभी भारतीय संस्कारों को महत्त्व नहीं दिया, आज वही इन संस्कारों का पालन कर रहे हैं। भारत की स्थिति अन्य देशों से बेहतर है लेकिन अच्छी नहीं। हमारे देश के जिन राज्यों ने अपने संस्कारों को संभाले रखा, वे स्वस्थ हैं, किंतु जिन्होंने नज़रअंदाज किया वे कोरोनावायरस से अधिक प्रभावित हुए। ऐसा ही हाल विदेशों का भी है। हमने वसुधैव कुटुम्बकम की परंपरा को कायम रखते हुए, यथासंभव सबकी मदद की।

कोरोना हारेगा, विश्व जितेगा। जय हिन्द

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