Poem

स्कूल

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क्या याद है तुम्हे वो दिन जो स्कूल में बिताए थे ।

जब हमने टीचर के अंतरंगी नाम गुन गुनाए थे।

जब हमने अपने मुसीबतों के किसे अपने दोस्तों को सुनाए थे।

तब दोस्तों ने वो किसे हँसते-हँसते सुलझाए थे।

 

 क्या याद है तुम्हे वो दिन जो स्कूल में बिताए थे ।

वो मैथ्स की कलास में साईंस पढ़ना।

वो स्कूल कैनटीन में  दूखी दोस्तों का मन बहलाना ।

और फिर वो चलती कलास में छुप-छुप कर टिफ़िन खाना ।

 

क्या याद है तुम्हे वो दिन जो स्कूल में बिताए थे ।

वो दोस्तों के साथ छुट्टी होने का इंतजार ।

वो कलास में टीचर न होने पे बवाल।

जिस पर माशा अल्लाह वो बेचारे मॉनीटर का बुरा हाल ।

 

 

क्या याद है तुम्हे वो दिन जो स्कूल में बिताए थे ।

वो दूसरों का मजाक उड़ाकर हँसना ।

वो दोस्तों की ग़लती में उनके साथ फसना।

अब इन बातों को याद कर दिल खुश हो जाता है, 

और इन सुनहरे पलों को फिर दोहराना चाहता है ।

 

 

                                     

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