Poem

आत्मा का श्रृंगार करो

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आत्मा का श्रृंगार करो

सत्य के सोपान से

शांति का गहना धरो

विश्व के कल्याण के लिए

 

सुख-दुख का पहिया चलता रहेगा

मत नश्वर जीवन से मोह लगाना

जागो प्यारे, तुम्हें है बहुत आगे जाना

अमर – अजेय आत्मा का श्रृंगार करो

 

ये सांसारिक बंधन हैं क्षणिक

मत इसमें उलझकर रह जाना

चिर निद्रा में खोने से पहले

सबको खुशियाँ बांटते जाना |

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