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Shayari by Sujay Phatak

Best Urdu Shayari from Sujay Phatak.

वो शख्स

हो चुका हर फन में ज़ेर-ए-दाम था

मुहल्ले का वो शख्स बड़ा बदनाम था

बनता कुछ काम ना बनता था उस से

नाकामी के आलम में था गुमनाम था

ज़माने से दूर अपनी अलग दुनिया में

चमकता हुआ सा था वो कोहराम था

छुपाना न सीखा था कुछ भी उसने

वो के जैसा भी था सर-ए-आम था

मुहब्बत

तय कर ली थी मुहब्बत उनकी

रब से ज़्यादा की इबादत उनकी

पड़ती जहाँ भी कहर बरपाती

निग़ह-ए-नाज़ क़यामत उनकी

लफ़्ज़ों में ढालते न बने किसी से

अदाएँ निहायत खूबसूरत उनकी

मोजज़ा-ए-आराइश दिल को छूता

माँगी खुदा से दीद की मोहलत उनकी

उफ्फ वो बदन की तराश का जादू

तौबा वो कशिश की विरासत उनकी

देखते ही हज़ारों धड़कने रोके

ज़ुल्फें हुस्न की अलामत उनकी

वैसे तो देखी थी बहुत ज़माने की

दिल फ़रेब थी पर शरारत उनकी

रूठ के दफ़अतन फ़िर मान जाना

अज़ब ही सी थी ये आदत उनकी

मुकम्मल न हो सकी तो न सही

ख्वाहिश ही सही सोहबत उनकी

देख के हमें आज फ़िर बदली राह

खुशी से झेली ये भी रहमत उनकी

इश्क़

पहले पहल तब दिल में आने लगे

जब देख के हमें वो मुस्कुराने लगे

ख्वाबों में अक्सर सताते थे हमको

अब तो वो सर-ए-आम सताने लगे

जलने लगे सियह रातों में जुगनू की तरह

हमको अपनी अदाओं से वो जलाने लगे

जो हो गए का कभी हम रुस्वा उनसे

बड़े नाज़-ओ-शौक से हमें मनाने लगे

कुछ वक्त लगा ज़रूर करीब आने में

राज़ दिल के लेकिन हमसे जताने लगे

ख़त जो भेजे राजदाँ के हाथों उन्होंने

हमें एहसास-ए-आशिक़ी दिलाने लगे

बड़े अदब-ओ-अंदाज़ की जानिब

हमें नज़्ज़ारा-ए-हुस्न दिखाने लगे

आशिक़ी में फँस ही गए ‘मुनफरिद’ उनकी

इश्क़ भँवर में कश्ती को अपनी डुबाने लगे

Sucheta Asrani

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